अमलताश के वृक्षों से छन धरती पर छितराई धूप
जाने किसके पग की पायल किसकी है शहनाई धूप
अगली-पिछली सारी बातें अपने सारे सुख और दुःख
कह लो सब कहनी-अनकहनी सबकी सुनने आई धूप
रस्ते-रस्ते आंसू बोया विपदाओं की काटी फ़स्ल
नम आँखों की भाषा पढकर चेहरों पर पथराई धूप
कितनी अच्छी लगती है जब सो जाती है कोई रात
रात की बातें सोच-सोचकर खुद से भी शरमाई धूप
बादल के संग आँख-मिचोली सूरज से आँखों में बात
मेरे जैसा कौन यहाँ पर फिरती है इतराई धूप
सपने मेरे आँखें तेरी चल सब कुछ यूँ बांटें हम
पनघट पीपल मंदिर पोखर सबसे यूँ कह आई धूप.