Tuesday, January 25, 2011

उम्र के उस पहर......

उम्र के उस पहर फिर यही रहगुजर
याद आएगी हम तुम मिले थे कभी

     पांखुरी-से ये दिन ये महक ये पवन
     अंजुरी में भरे अर्घ्य-सा मौन मन
     जब कभी उम्र के अजनबी मोड़ पर
     कह विदा छोड़ जायेंगे गीले नयन
और तनहा लगेगा ये जीवन-सफ़र
उम्र के उस पहर फिर यही रहगुजर
याद आएगी हम तुम मिले थे कभी.

     सांस के  तार पर स्नेह-धुन ज़िन्दगी
     ऊबकर हो उठेगी कभी बेसुरी
     यूँ लगेगा कि परिचित कसक-सी कहीं
     रह गयी है दबी कोंचती हर घड़ी
और देखेगी जब दूर उठती नज़र
उम्र के उस पहर फिर यही रहगुजर
याद आएगी हम तुम मिले थे कभी.

     जब मिलेंगे कभी अजनबी-से कहीं
     तुम कहोगी कि तुम अब तलक हो वही
     कोर पर होंठ के ले हंसी पोपली
     मैं कहूँगा कि तुम भी तो बदलीं नहीं
और घट जाएगी कई दशक यह उमर
उम्र के उस पहर फिर यही रहगुजर
याद आएगी हम तुम मिले थे कभी.

     कल कहीं दूर मैं कल कहीं दूर तुम
     भीड़ में ज़िन्दगी की रहें होके गुम
     वैसे आयें न चाहे कभी याद पर
     मौत जब जिस घड़ी आँख कर देगी नम
सांस का ख़त्म होने लगेगा सफ़र
उम्र के उस पहर फिर यही रहगुजर
याद आएगी हम तुम मिले थे कभी.

6 comments:

  1. आज आपकी कविता पढकर दो बातें याद आ गईं.. पहला तो एक गाना कि हम जब होंगे साठ साल के, और तुम होगी पचपन की,बोलो प्रीत निभाओगी न तब भी अपने बचपन की!
    और दूसरी बात एक कमी कि अगर मैं संगीतकार होता तो आपकी कुछ बेहतरीन रचनाओं, जिनमें यह भी शामिल है, अवश्य संगीतबद्ध करता.. अद्भुत लयात्मकता से भरी एक गेय कविता है यह!!

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  2. "कल कहीं दूर मैं कल कहीं दूर तुम
    भीड़ में ज़िन्दगी की रहें होके गुम
    वैसे आयें न चाहे कभी याद पर
    मौत जब जिस घड़ी आँख कर देगी नम
    सांस का ख़त्म होने लगेगा सफ़र
    उम्र के उस पहर फिर यही रहगुजर
    याद आएगी हम तुम मिले थे कभी."

    प्रोफ़ैसर सहब, हमारी इल्तिज़ा पर ये और जोड़ दीजिये कि ’फ़िर मिलेंगे जरूर।’

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  3. गिरिजेशजी के कहने पर ये ब्लॉग पढना चालु किया था. आज गुनगुनाने वाली इस पोस्ट पर इस बक्से में भी हाजिरी देने आना पड़ गया.

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  4. पार्श्व में कही गीत बज रहा है," तुम्हे याद होगा कभी हम मिले थे" ...

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  5. बहुत ही सुंदर लगा।

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  6. कविता में यह बात कितनी आसान लगती है .......उम्र के उस पहर फिर यही रहगुजर याद आएगी हम तुम मिले थे कभी. ...........लेकिन क्या अपने जिये जाने में भी यह इतनी ही आसान है ??
    शायद नहीं !

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